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राजस्थान में गौशालाओं को अनुदान पर मायावती ने साधा बीजेपी पर निशाना

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बहुजन समाज पार्टी बसपा अध्यक्ष मायावती ने बुधवार को बीजेपी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को घेरते हुए राजस्थान में गौशालाओं को मिलने वाले अनुदान पर सवाल उठाया. मायावती ने यहां जारी एक बयान में कहा, भाजपा सरकार के गुड गवर्नेन्स सुशासन में इंसानी जान की कोई कीमत नहीं रह गयी है. लेकिन जिस प्रकार भारी भ्रष्टाचार के कारण गायों को भूख-प्यास के कारण तड़प-तड़प कर मरने को छोड़ दिया जा रहा है, संघ और अन्य लोग सरकार से उसका हिसाब क्यों नहीं मॉंग रहे उन्होंने कहा कि पहले राजस्थान में और अब दूसरे भाजपा शासित राज्य छत्तीसगढ़ से सरकारी मदद वाली गौशालाओं में गायों की मौत की खबर आयी है. प्रदेश के जालौर जिले की विभिन्न गौशालाओं में भी बारिश के कारण बड़ी संख्या में गायों की मौत हो गई थी.

बुधवार से क्रमिक अनशन, 29 को भीनमाल बंद, पांचवें दिन किसानों का धरना जारी

सांगी नदी के तट पर दोनों तटोंं पर पक्की पिचिंग बनाने सहित अन्य मांगों को लेकर राजस्थान किसान संघर्ष समिति के बैनर तले आज रविवार को पांचवें दिन भी धरना जारी रहा। आज किसान नेताओं ने प्रेस वार्ता का आयोजन रखा। समिति के संयोजक विकमसिंह पुनासा ने कहा कि भीनमाल सहित सांचोर क्षेत्र में सांगी नदी में बाढ़ आने पर इसका पानी किसानों के खेतों का तबाह करता है।  इसके स्थायी समाधान को लेकर समिति ने राज्य सरकार को 35 करोड़ 70 लाख रूपए का प्रपोजल बनाकर भेजा थाए बावजूद इसके, जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों में जुनून व आत्मविश्वास की कमी के चलते सरकार ने किसानों की आवाज का अनसुना कर दिया। पुनासा ने कहा कि किसानों की अब प्रबल मांग यह है कि सांगी नदी के दोनों ओर पक्की मेडबंदी कर नदी के कमांड क्षेत्र में खड़ी अंग्रेजी बबूल की झाडिय़ों को हटाया, ताकि बाढ़ आने की सूरत में खेतों का नाश होने से बचाया जासके। उन्होंने कहा कि जिला कलक्टर लक्ष्मीनारायण सोनी ने 8 तारीख को आदेश जारी कर सभी विकास अधिकारियों सहित एसडीएम को पाबंद किया था कि आप ग्राम पंचायतों के माध्यम से नदी नालों में खड़ी अंग्रेजी बबूल की झाडिय़ों क...

भीनमाल मे किसानों के अनिश्चितकालीन धरने पर तीसरा दिन

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सैकड़ों की संख्या मे किसानों के साथ महिलायें पहुँची धरना स्थल पर, किसानों की ज्यादा संख्या होने के कारण उपखण्ड अधिकारी कार्यालय का रास्ता हुआ बंद, राजस्थान किसान संघर्ष समिति के बैनर तले बाढ से हुए नुकसान का मुहावजा देने, सागी नदी से बबुल हटाने, नदी के दोनों और मेड़बंदी सहित विभिन्न मांगो को लेकर उपखंड मुख्यालय के आगे चल रहा है धरना आहत बाढ़ प्रभावितों को राहत दिलाने एवं भविष्य की बाढ़ से बचाव की मांग को लेकर भीनमाल उपखंड मुख्यालय पर राजस्थान किसान संघर्ष समिति के बैनर तले किसानों की अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी है। आज तीसरे दिन भी जिले भर के किसानों ने धरनास्थल पहुंचकर

श्रीमाल पुराण में वर्णित प्राचीन भीनमाल के जल स्रोतों के नाम और दिशाएं

अपने शहर भीनमाल (Bhinmal) के गौरवशाली अतीत और वर्तमान की यात्रा इस पेज पर जारी है। इसी क्रम में आज बात करते है भीनमाल के प्राचीन जल स्रोतों की। लगभग सातवीं शताब्दी तक भीनमाल (श्रीमाल, रत्नमाल, भिन्नमाल आदि नामों से उल्लेखित) पश्चिमी भारत का न सिर्फ एक बहोत बड़ा शहर था बल्कि व्यापार, शिक्षा और संस्कृति का भी एक बड़ा केंद्र था।अब यह सर्वमान्य ऐतिहासिक सत्य है। बोम्बे गजेटियर में अंग्रेज यात्री निकोलस उसलेट,  ‪ श्रीमाल‬  पुराण (स्कन्द पुराण), जैन ग्रन्थ निशीथ चूर्णी, चीनी यात्री ह ्वेनसांग के यात्रा स्म्रति दस्तावेज, गणितज्ञ ब्रह्मगुप्त रचित ब्रह्मस्फुट सिद्धान्त सहित कई ग्रंथो और ऐतिहासिक दस्तावेजों में इस शहर के सामाजिक, राजनेतिक विस्तार और भौगोलिक स्थिति का वर्णन आता है। तत्कालीन समय में  ‪ भीनमाल‬  एक बहोत बड़ा शहर था अब यह सर्वमान्य ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित तथ्य है।भीनमाल शहर लगभग 36 से 64 मील तक के विस्तार के क्षेत्रफल वाला था,तो स्वाभाविक है की इतने बड़े भौगोलिक क्षेत्र वाले नगर की जनसंख्या के हिसाब से जल स्रोत भी अधिक होंगे ही।

वराहश्याम‬ की पोल

भीनमाल (Bhinmal) के गौरवशाली अतीत और वर्तमान की यात्रा इस पेज पर जारी है। इसी क्रम में आज बात करते है  ‪‎ भीनमाल‬  के प्राचीन वराहश्याम मंदिर के बाहर बनी ‪  वराहश्याम‬  की पोल की। वर्तमान भीनमाल (Bhinmal)शहर के मुख्य बाजार /  ‪ सदरबाजार‬  के प्रवेश द्वार पर एक विशाल पोल (Gateway)बनी हुई है जिसे श्री वराहश्याम की पोल के नाम से जाना जाता है। यह पोल आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया (ASI) के अनुसार 14वीं शताब्दी में बनी हुई है। "वराहश्याम की पोल' भीनमाल शहर का एक जीवंत  ‪ पुरातात्विक‬   स्थल है। निर्माण ‪ ‎ अभिलेख‬  /शिलालेख तो अब काल का ग्रास बन चुके है। परन्तु प्राचीनता स्वयं सिद्ध है और पुराने ज़माने की मजबूत स्थापत्य कला का अद्भुत नमूना भी है यह पोल। ‪‎ होली‬  के त्यौहार पर इसी पोल के एक भाग में स्थापित लोक देवता ईलोजी या गल्लाजी भाट का नूतन रंगरोगन आदि परंपरा से किया जाता है। इस पोल में वराहश्याम  ‪‎ मंदिर‬  का खुला नोपतखाना भी बना हुआ है जिसमे नगाड़े आदि रखे जाते है।

श्री बाफनावाड़ी जैन तीर्थ भीनमाल

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भीनमाल के वर्तमान और जाज्वल्यमान इतिहास की श्रंखलायें इस पेज के माध्यम से जारी है। आज बात करते है श्री "बाफना वाड़ी जैन तीर्थ" (भीनमाल)) की। भीनमाल के जैन समाज के समस्त बाफना गोत्रिय परिवार की प्रतिनिधि संस्था बाफना रिसर्च सेंटर एवं कल्चरल सोसाइटी द्वारा श्री  ‪ बाफनावाड़ी‬   ‪ जैन‬   ‪‎ तीर्थ‬  (BafnaWadi) का निर्माण सन् 2004 से 2006 के बीच में करवाया गया। लगभग 5 एकड़ क्षेत्र में फैला श्री बाफनावाड़ी जैन तीर्थ भीनमाल (Bhinmal) शहर से 5 किलोमीटर की दुरी पर शहरी कोलाहल से दूर शांत प् राकर्तिक वातावरण में मुख्य मार्ग -रानीवाड़ा रोड (भीनमाल - अहमदाबाद मार्ग) पर स्थित है। बाफनावाड़ी जैन तीर्थ की ओपचारिक स्थापना लगभग 9 वर्ष पूर्व सन् 2006 में हुई थी। इस तीर्थ के भगवान महावीर जिनालय - राजेन्द्र सुरि गुरु मंदिर आदि की प्रतिष्ठा-अंजनशालाका सौधर्म वृहत् तपगच्छिय त्रिस्तुतिक संघ के वर्तमान आचार्य श्रीमद्विजय जयानंद सुरिश्वरजी के कर-कमलो हुई थी। श्री बाफनावाड़ी तीर्थ संकुल में भीनमाल के समस्त बाफना गोत्रिय परिवारों का लगभग 200 वर्षो का इतिहास - वंशावली वृक्ष के रूप में का...

श्री महालक्ष्मी ‪‎कमलेश्वरी‬ माता का मंदिर भीनमाल

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अपने शहर भीनमाल (Bhinmal) के इतिहास और वर्तमान की अभिनव यात्रा इस पेज के जरिये जारी है। आज बात करते है धोराढाल स्थित पुराने महालक्ष्मी मंदिर की। ‪‎ भीनमाल‬  (Bhinmal) का प्राचीन और इतिहास प्रसिद्ध नाम  ‪‎ श्रीमाल‬  नगर है। इस नामकरण के पीछे किवदंती यह है की यह नगर स्वयं विष्णु भार्या देवी महालक्ष्मी माताजी ने बसाया था। "श्री'' अर्थात महालक्ष्मी और "माल'' याने नगर। भीनमाल में दो  ‪ महालक्ष्मी‬   ‪‎ मंदिर‬  हैे। एक प्राचीन महालक्ष्मी -कमलेश्वरी मंदिर (धोरा-ढाल) में और दूसरा मुख्य ब ाजार के महालक्ष्मी मंदिर मार्ग पर महालक्ष्मी मंदिर । धोराढाल में बिराजित महादेवी श्री महालक्ष्मी  ‪‎ कमलेश्वरी‬  माता का मंदिर श्रीमाल नगर के समय का प्राचीन मंदिर माना जाता है। हालाँकि मंदिर में लगे एक ऐतिहासिक ‪ ‎ शिलालेख‬  के अनुसार यह मंदिर विक्रम संवत 1342 में बना हुआ है (सन् 1286)। इस शिलालेख की वतर्मान स्थिति बड़ी दयनीय है (फोटो इस पोस्ट के साथ प्रकाशित है)। आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया के अनुसार वर्तमान मंदिर 11वीं सदी का बना हुआ है। इतिहास सरंक्षण के...