गुर्जर आरक्षण: हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा जवाब, अगली सुनवाई 2 अप्रैल को

गुर्जर आरक्षण मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया है. मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नंद्राजोग की खण्डपीठ ने अरविंद शर्मा और बादल वर्मा की याचिका पर सोमवार को सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है. याचिका में राजस्थान पिछड़ा वर्ग संशोधन अधिनियम-2019 को चुनौती दी गई है.
गुर्जर आरक्षण: एमबीसी का पांच फीसदी आरक्षण तत्काल सुनिश्चित करने के निर्देश
याचिका में कहा गया है कि सरकार ने बिना किसी संख्यात्मक अध्ययन के गुर्जर सहित 5 जातियों को पांच प्रतिशत आरक्षण दिया है, जो असंवैधानिक है. वहीं अगर सरकार 50 प्रतिशत की सीमा को पार करती है तो यह विशेष परिस्थितियों में ही किया जा सकता है, जबकि प्रदेश में ऐसी कोई विशेष परिस्थिति नहीं है. कोर्ट ने राज्य सरकार को 10 दिन में जवाब देने के लिए कहा है. अब मामले की अगली सुनवाई 2 अप्रेल को होगी.

गत माह नौ दिन तक पड़ाव डाले रखा था गुर्जर समाज ने
उल्लेखनीय है कि पांच फीसदी आरक्षण के मसले को लेकर गत माह गुर्जर समाज ने दिल्ली-मुंबई रेलवे ट्रैक पर नौ दिन तक पड़ाव डाले रखा था. गुर्जरों की मांग को देखते हुए राज्य सरकार ने उसी अवधि में विधानसभा में इसका विधेयक पारित करवाया था. उसके बाद राज्यपाल ने इस विधेयक को मंजूरी दे दी थी. इस विधेयक के साथ ही राज्य विधानसभा ने विधेयक को संविधान की 9वीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए एक शासकीय संकल्प भी ध्वनिमत से पारित किया था.

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